Tuesday, December 1, 2020

amma's tales

 

शास्त्रों में कई ऐसी कहानी और कथा है जिन्हे आप सभी को जानना चाहिए. ऐसे में आज हम लेकर आए हैं आपके लिए तुलसी माता की वह कहानी जो बहुत कम लोग जानते हैं.

पौराणिक कथा - कार्तिक महीने में सब औरते तुलसी माता को सींचने जाती थी . सब तो सींच कर आती परन्तु एक बूढ़ी माई आती और कहती – हे तुलसी माता ! सत की दाता , मैं बिलड़ा सींचूं तेरा , तू कर निस्तारा मेरा , तुलसी माता अड़ुआ दे लडुआ दे , पीताम्बर की धोती दे , मीठा मीठा गास दे , बैकुंठ का वास दे , चटके की चाल दे , पटके की मौत दे , चन्दन की काठ दे , झालर की झनकार दे , साई का राज दे , दाल भात का जीमन दे , ग्यारस की मौत दे , श्रीकृष्ण का कांधा दे. यह बात सुनकर तुलसी माता सूखने लगी. भगवान ने पूछा हे तुलसी ! तुम क्यों सूख रही हो ? तुम्हारे पास इतनी औरतें रोज आती है , तुम्हे मीठा भोग लगाती है , गीत गाती है.

तुलसी माता ने कहा एक बूढ़ी माई रोज आती है और इस तरह की बात कह जाती है. मैं सब बात तो पूरी कर दूंगी पर कृष्ण का कन्धा कहाँ से दूंगी. भगवान बोले – ” वह मरेगी तो कन्धा मैं दे आऊंगा ” कुछ समय पश्चात बूढ़ी माई का देहांत हो गया. सारे गाँव वाले एकत्रित हो गए और बूढ़ी माई को ले जाने लगे , पर वह इतनी भारी हो गयी की किसी से भी नहीं उठी. सबने कहा – इतना पूजा पाठ करती थी , पाप नष्ट होने की माला फेरती थी, फिर भी इतनी भारी कैसे हो गयी. बूढ़े ब्राह्मण के रूप में भगवान वहाँ आये और पूछा – ये भीड़ कैसी हैं ? तब वहाँ खड़े लोग बोले ये बूढ़ी माई मर गयी है. पापिन थी इसीलिए भारी हो गयी है किसी से भी उठ नहीं रही है. भगवान ने कहा मुझे इसके कान में एक बात कहने दो , शायद उठ जाये.

भगवान ने बूढ़ी माई के पास जाकर कान में कहा – बूढ़ी माई मन की निकाल ले , अड़ुआ ले गडुआ ले , पीताम्बर की धोती ले , मीठा मीठा ग्रास ले , बैकुण्ठ का वास ले , चटक की चाल ले, चन्दन की काठ ले , झालर की झंकार , दाल भात का जीमन ले , और …. कृष्ण का कांधा भी ले. इतना सुनना था की बुढ़िया हल्की हो गयी. भगवान अपने कंधे पर ले गए और बुढ़िया को मुक्ति मिल गयी. हे तुलसी माता ! जैसी मुक्ति बूढ़ी माई की करी , वैसी ही हमारी भी करना और जैसे उसको कन्धा मिला वैसे सभी को देना. बोलो तुलसी माता की….. जय !!!

 

 

 

 

 

* पढ़ें श्री गणेशजी की की मजेदार कहानी
एक बार गणेशजी एक छोटे से बालक का रूप रखकर एक गांव में आए। वे देखना चाहते थे कि इस पृथ्‍वी पर कुछ है या नहीं? वे चिमटी में चावल और चमची में दूध लेकर गांव में घर-घर घूमकर कहते कि मेरे लिए खीर बना दो।> > लोग उसकी बात सुनकर उसे देखने आते और हंसी उड़ाते। सब लोग उससे कहते कि इतने से दूध-चावल से भी कोई खीर बनती है? लोगों का उत्तर सुनकर बालक आगे को चल देता। 
 
इस प्रकार चलते-चलते बालक अंत में एक बुढ़िया के पास पहुंचा। वहां बहुत से बच्चे खेल रहे थे और बुढ़िया बैठी-बैठी बच्चों के खेल का आनंद ले रही थी।
गणेशजी ने कहा- मां, इन चावल और दूध से मेरे लिए खीर बना दो। बुढ़िया ने हंसकर मजाक करते हुए कहा- बेटा, खीर तो बना दूं, परंतु मुझे भी खीर देगा कि नहीं।

लड़के ने कहा- जरूर आपको दूंगा और सब बच्चों को भी दूंगा। तब तो बुढ़िया घर के अंदर से एक छोटी-सी भगोनी लेकर आई।

लड़के ने कहा- मां, इतनी-सी छोटी भगोनी से क्या होगा। आप बड़ा सा बर्तन लाओ, उसमें खीर बनाना। बुढ़िया फिर से एक बड़ा बर्तन लेकर आई। उसमें दूध और चावल डलवा दिए और चूल्हे पर खीर बनाने के लिए रख दी। 
 
खीर उफनने लगी तो बुढ़िया ने थोड़ी सी खीर प्याले में निकाल ली। थोड़ी-सी ठंडी करके, गणेशजी का नाम लेकर (भोग लगाकर) चखने लगी। खीर तो बहुत स्वादिष्ट बनी थी।

बुढ़िया के लड़के को आवाज लगाई, ले बेटा खीर बन गई, खा ले। लड़के ने कहा, मां, खीर से तो मेरा पेट भर गया, अब आप खाओ और इन सब बच्चों को खिला दो।

बुढ़िया ने कहा- बेटा, तूने खीर तो खाई नहीं, फिर पेट कैसे भर गया? लड़के ने कहा- आपने मेरा प्रेम से नाम लेकर दरवाजे के पीछे खड़े होकर खीर खाई थी, उससे मेरा पेट भर गया। 
 
बुढ़िया समझ गई कि यह बालक तो साक्षात गणेशजी का रूप है। वह खीर सभी बच्चों को, जो वहां खेल रहे थे, उन्हें भी खिलाई तो भी बर्तन भरा हुआ था। अब गांव के सभी लोगों को बुला-बुलाकर बुढ़िया ने खीर खिलाई, तो सभी आश्चर्य करने लगे।

अंत में बुढ़िया को गणेशजी ने आशीर्वाद दिया कि जैसे खीर को छेव नहीं आयो, वैसे ही थारा घर में कोई छेव नहीं आएगा। बुढ़िया अब तो आनंद और ठाठ-बाट से रहने लगी। 



 

Wednesday, June 19, 2019

Main Tenu Fir Milaan Gi

Main Tenu Fir Milaan Gi
Kithey? Kis Tarah? Pata Nai
Shayad Terey Takhayul Di Chinag Ban Ke
Terey Canvas Tey Utraan Gi
Ya Khowrey Terey Canvas Dey Utey
Ikk Rahasmayi Lakeer Ban Ke
Khamosh Tenu Tak Di Rawaan Gi
Yaa Khowrey Sooraj Di Loo Ban Ke
Terey Rangaan Wich Ghulaan Gi
Yaa Rangaan Diyan Bahwaan Wich Baith Ke
Terey Canvas Nuu Walaan Gi
Pata Nai Kiss Tarah? Kithey?
Par Tenu Zaroor Milaan Gi
Yaa Khowrey Ikk Chashma Bani Howaan Gi
Tey Jeevan Jharneyaan Da Paani Udd-da
Main Paani Diyaan Boondaan
Terey Pindey Tey Malaan Gi
Tey Ikk Thandak Jahi Ban Ke
Teri Chaati Dey Naal Lagaan Gi
Main Hor Kujh Nai Jaandi
Par Aena Jaandi
Ke Waqt Jo Vii Karey Ga
Aey Janam Mairey Naal Turey Ga
Aey Jism Mukda Hai
Tay Sab Kujh Muk Jaanda
Par Chaityaan Dey Dhaagey
Kaainaati Kana Dey Hundey
Main Onhaan Kana Nuu Chunaan Gi
Dhaageyaan Nuu Walaan Gi
Tey Tenu Main Fair Milaan Gi…
– AMRITA PRITAM
I will meet you yet again
How and where? I know not.
Perhaps I will become a
figment of your imagination
and maybe, spreading myself
in a mysterious line
on your canvas,
I will keep gazing at you.
Perhaps I will become a ray
of sunshine, to be
embraced by your colours.
I will paint myself on your canvas
I know not how and where –
but I will meet you for sure.
Maybe I will turn into a spring,
and rub the foaming
drops of water on your body,
and rest my coolness on
your burning chest.
I know nothing else
but that this life
will walk along with me.
When the body perishes,
all perishes;
but the threads of memory
are woven with enduring specks.
I will pick these particles,
weave the threads,
and I will meet you yet again.
-Amrita Pritam.

Thursday, March 7, 2019

Reason

I've heard it's said,
That people come into our lives for a reason
Bringing in something we must learn.
And we are led to those ,who help us most to grow.

Well, I don't know if I believe that's true
But I know that i have known you...

Who can say if I've been changed for the better
But because I knew you, have I changed for good ?

Let me say if we part,so much of me is made of you.
You'll be with me Like a handprint on my heart.
And now whatever way our stories end ,I know you have rewritten mine.

 

Tuesday, December 18, 2018

Eternal

I have always hugged the storms, then why does this serenity draws me . 
 A thousand emotions have always baffled me , but this one seems so right. 
Jumping into whirlpools was my pastime, but floating in this stillness seems so complete 
Nomadic were my ways, settling dust on this horizon beckons me now. 
Why does this pause seems to eternal when I think of you 
, as these lips part not in lust, not in love, 
is it reverence then ?

Monday, November 19, 2018

aisa kaise



किसी-किसी के लिए हम कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं.  जैसे की कोई बस ही नहीं होता खुद पर.
कहते हैं की अपनी किस्मत अपने हाथ होती है तो फिर क्यों ऐसे होता है की ऐसा लगता की सब गलत है पर फिर भी ठीक है।

Sometime a when a million parts dont fit the role,
then how does a smile from someone rejuvinates your soul ?

I push myself back ,  i struggle with the heart.
still it goes out to play in the dark.
The love in the arms and assuarance in the kiss
I know its feigned ,then why does this illusion seems to real ?

its just a sand castle treading unstable grounds
then why do i call out to the waves challenging them to knock it down.

I look at you  and everything is made out of light.
I melt away, let my demons burn,
I open the gates, and let the little girl escape.

you are just a fantasy
a mirage a longing
just like a kid who belives in fairy tales
i assure myself , you "do"

but then the rationality jolts me up
And tells me I’m a fool
To break all ties and take away the







Thursday, November 1, 2018

पिया तोसे नैना लागे रे

पिया तोसे नैना लागे रे
पिया तोसे नैना लागे रे
जाने क्या हो अब आगे रे.... नैना लागे रे
पिया तोसे नैना लागे रे

रात को जबचाँद चमके जल उठे तन मेरा मैं कहूँ  मतकरो रे चंदा इस गली का फेरा :)
आना मोरे सैयां जब आये चमकना उस रात को जब मिलेंगे तन मन
पिया तोसे पिया तोसे पिया तोसे नैना लागे रे :)


Wednesday, October 31, 2018

कितने चेहरे हैं हमारे आस पास
कितने जाने पहचाने से लगते हैं
आज काफ़ी दिन बाद लोकल ट्रेन में सफ़र किया
लोगों की भीड़ देखी
देखा कैसे लोग एक एक तिनके से हैंडल के सहारे खड़े हैं
देख रहे हैं अपने फ़ोनो में
बीच बीच में सर उठा के इधर उधर देख कर फिर वही

एक लड़की पर निगाह गयी . पहला ख़याल आया
तारे ये तो मेरे जैसी दिखती है 
मन भी क्या क्या सोच लेता है ना
कहाँ से कहाँ कनेक्शन 
फिर देखी उसकी मुस्कान
उसके चेहरे का ठहराव

लगा की क्यूँ मैं ही दुखी हूँ 
क्यूँ मुझमें ही energy का अभाव है 
क्यूँ मैं हाई उलटा सीधा सोचती हूँ

ये जितने भी लोग हैं ट्रेन में 
सबकी लाइफ़ में कुछ ना कुछ तो होगा ना
सबकी परेशनियाँ होंगी 
किसी के बच्चे की किसी की नौकरी की 
किसी के सात समुन्दर पार माँ बाप की 
पर फिर भी ये लोग सब ट्रेन में एक satisfaction
के साथ लग रहे हैं
चाहे वो लड़का हो जो मोबाइल पे गेम खेल रहा है 
या वो जो फ़ेस्बुक पे चैट कर रही है 
या वो जो सो रही है 
सब घर जाने को बेताबहैं 

ये ट्रेन की जर्नी आज फिर से मुझे 
Remind करवा रही है 
To be grateful and thankful 
चिंता सबको होती है 
चाहे वो हो जो मिल्यन का मकान बना रहा हो
चाहे वो जो अपर्टमेंट का रेंट भर रहा हो

बस भगवान को बोलना है 
थैंक्स एंड love you lots !