Wednesday, October 31, 2018

कितने चेहरे हैं हमारे आस पास
कितने जाने पहचाने से लगते हैं
आज काफ़ी दिन बाद लोकल ट्रेन में सफ़र किया
लोगों की भीड़ देखी
देखा कैसे लोग एक एक तिनके से हैंडल के सहारे खड़े हैं
देख रहे हैं अपने फ़ोनो में
बीच बीच में सर उठा के इधर उधर देख कर फिर वही

एक लड़की पर निगाह गयी . पहला ख़याल आया
तारे ये तो मेरे जैसी दिखती है 
मन भी क्या क्या सोच लेता है ना
कहाँ से कहाँ कनेक्शन 
फिर देखी उसकी मुस्कान
उसके चेहरे का ठहराव

लगा की क्यूँ मैं ही दुखी हूँ 
क्यूँ मुझमें ही energy का अभाव है 
क्यूँ मैं हाई उलटा सीधा सोचती हूँ

ये जितने भी लोग हैं ट्रेन में 
सबकी लाइफ़ में कुछ ना कुछ तो होगा ना
सबकी परेशनियाँ होंगी 
किसी के बच्चे की किसी की नौकरी की 
किसी के सात समुन्दर पार माँ बाप की 
पर फिर भी ये लोग सब ट्रेन में एक satisfaction
के साथ लग रहे हैं
चाहे वो लड़का हो जो मोबाइल पे गेम खेल रहा है 
या वो जो फ़ेस्बुक पे चैट कर रही है 
या वो जो सो रही है 
सब घर जाने को बेताबहैं 

ये ट्रेन की जर्नी आज फिर से मुझे 
Remind करवा रही है 
To be grateful and thankful 
चिंता सबको होती है 
चाहे वो हो जो मिल्यन का मकान बना रहा हो
चाहे वो जो अपर्टमेंट का रेंट भर रहा हो

बस भगवान को बोलना है 
थैंक्स एंड love you lots ! 


Tuesday, October 30, 2018

Pain

I want to know your demons
without delving into any reasons

Tell me what frightens you at the night
But not the foot you put outright

What's that hurt in the eyes so deep
leave alone the smiles that sweep

Give me your anguish, your agony
for anyone can partake your joy.

Let me hear your dark side
The longing that makes you sin
The emptiness that makes you cringe
The fear that makes you dread.

Let me kiss your pain away
Healing "my" soul along the way <3